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“विश्व शान्ति गणदूत” के समस्त विचारों का केन्द्र बिन्दु डा•गोपाल चन्द्र मजूमदार उर्फ बेनीमाधव ही हैं।
वैसे तो इनके मौलिक विचारों से लोग तब अवगत हुयें,जब डा•गोपाल चन्द्र मजूमदार ने ‘बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय’ के उपकुलपति डा•रस्तोगी से अनुमति लेकर वी•एच•यू• के लंका गेट पर “विश्व राष्ट्र प्रेम” के झंडे को सन•1987 में स्थापित किया।
तदनंतर निरन्तर डा•मजूमदार अपनी लेखनी एवं कार्यक्रमो के माध्यम से कुछ ना कुछ करते रहें हैं।
उनके विचारों एवं कार्यक्रमो में मीरजापुर,उ•प्र•के
अनेको गणमान्य लोंगो ने सहर्ष साथ दिया है।
“विश्व शान्ति गणदूत”का जो रूप आज आपके सामने
दिख रहाँ हैं,वह निश्चय रूप से “बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय” से ही आरम्भ हुआ है,किन्तु इसके पहले से ही डा• गोपाल चन्द्र मजूमदार विश्व शान्ति के लिए निरन्तर चिन्तन-मनन एवं मन्थन करते चले आये थे। बाल्यकाल से ही  डा• मजूमदार धार्मिक स्वभाव के हैं।जब आप साँतवी कक्षा में पढ़ते थे,तब से ही विश्व शान्ति एवं धार्मिक मतभेद को मिटाने के लिए आप निरन्तर चिन्तन-मनन दिन-रात किया करते थे।
डा•मजूमदार युवावस्था में आने के साथ-साथ सभी धर्मो का अध्ययन,मनन,चिन्तन एवं मन्थन भी कर चुके थे।
तत्पश्चात ही “विश्व शान्ति गणदूत”आज  सम्पूर्ण विश्व में विश्व शान्ति एवं विश्व प्रेम को स्थापित करने के लिए एक स्तम्भ ज्योति के रूप में खड़ा हुआ है।

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आपका जन्म 9 मई 1951ई•को मीरजापुर,उत्तर प्रदेश में हुआ हैं। शुरु से ही आपकी रुचि धर्म,संगीत,कला,एवं साहित्य,कविता में रही हैं। आपके पिता स्वर्गीय रसिक लाल मजूमदार एवं माता स्वर्गीय इंदूमती मजूमदार है। आपने बिहार विश्वविद्यालय से डी•एच•एम•एस•डिग्री उत्तीर्ण किया है। आप अपने उददेश्य को मूर्तिरूप देने के लिए “विश्व शान्ति गणदूत समिति” की स्थापना सन•1994 ई•में मीरजापुर में किया। कालान्तर में इसी उददेश्य के पूर्ति के लिए “विश्व शान्ति गणदूत” न्यास विलेख (TRUST) भी स्थापित हुआ।
आपने कई पुस्तकें लिखीं हैं। इन्हीं पुस्तकों एवं लेखनी के आधार पर आपको कई पुरस्कार एवं सम्मानित खत भी प्राप्त हुए हैं। आपकी कविताओं की पुस्तके “तुम प्रकृति प्रिया हो”,”आँसुओ के बीज से” एवं दर्शन लेख के रूप में “मानव समाज का फैसला”,”सम्पूर्ण विश्व में केवल चार दर्शन हैं”,”परिपूर्ण शाश्वत प्रेम दर्शन” हैं। एक लेखक के रूप में आपने एक नये चिन्तन को स्थापित किया हैं। यही कारण है कि आपकी लेखनी को देखकर रेड एंड बरेबरी द्वारा अलौकिक कार्य कहा गया हैं।आपको विश्व शान्ति के लिए सन• 2000 ई•में “अन्तर्राष्ट्रीय विश्व शान्ति प्रबोधन महासंघ”-यू•एस•ए•एवं विश्व स्तरीय एन•जी•ओ• द्वारा “ह्यूमन राइट मिलेनियम एवार्ड”से सम्मानित किया गया है ।
भूतपूर्व प्रधानमंत्री मा• अटल बिहारी वाजपेयी ने आपके विचारों एव॔ कार्यक्रमो की पत्र द्वारा सराहना की है।
भूतपूर्व राष्ट्रपति मा• डा•के•आर•नारायणन ने भी पत्र द्वारा आपके विचारों के प्रति सम्मान जाहिर किया हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उपकुलपति (वाइस चांसलर) प्रोफेसर रतन लाल हंगल ने डा•गोपाल चन्द्र मजूमदार के मौलिक विचारों की सराहना की एवं पत्र के माध्यम से कहा कि I hope that your efforts will be of great academic significance.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की तरफ से कहा गया है कि Hope it will give brightness to the world peace ,enlighting brotherhood on the globe and our readers will certainly inspired from same.

डा•गोपाल चन्द्र मजूमदार के विचारों एवं कार्यक्रमो में अनेको गणमान्य व्यक्ति सहर्ष सम्मिलित हुये।
पादरी साहब आर•पौल,स्वतंत्रता संग्रामी सेनानी जिलाध्यक्ष श्री विद्यासागर शुक्ल,डाॅ•सरजीत सिन्ह  डन्ग भूतपूर्व मंत्री,स्वर्गीय अज़हर इमाम वरिष्ठ नेता एडवोकेट,स्वर्गीय उमाकांत मिश्रा भूतपूर्व एम•पी•,भगवती प्रसाद चौधरी भूतपूर्व जिला परिषद अध्यक्ष,राजीव साइलस भूतपूर्व चेयरमैन नगरपालिका परिषद,स्वर्गीय श्री उमाकांत मिश्रा भूतपूर्व जिला कापरेटिब अध्यक्ष,स्वर्गीय भवदेव पांडेय वरिष्ठ साहित्यकार,श्री भोलानाथ कुशवाहा वरिष्ठ साहित्यकार एवं भूतपूर्व उपसम्पादक (इलाहाबाद आज समाचार) और अनेको गणमान्य लोग हैं।
अम्बिका प्रसाद गुप्ता भूतपूर्व जिला जज,प्रभात कुमार मजूमदार भूतपूर्व जिला अध्यक्ष सेल टैक्स बार कौन्सिल,स्वर्गीय सरदार प्रीतम सिंह,अजय साध,स्वर्गीय देवी प्रसाद दूबे,सुरेश चन्द तिवारी,शशि शंकर तिवारी,स्वर्गीय गुलाब चन्द केशरवानी,स्वर्गीय अमरनाथ केशरवानी,डाॅ•पी•आर•सिन्ह भूतपूर्व प्रोफेसर,रामकृष्ण,ए•आर•फारमर

“विश्व शान्ति गणदूत” के पदाधिकारी

अध्यक्ष        डाॅ•गोपाल चन्द मजूमदार
उपाध्यक्ष      अताउल्लाह सिद्दिकी
सचिव          रमेश चन्द्र
कोषाध्यक्ष     शिव प्रकाश अग्रवाल
उपसचिव       मनमोहन कृष्ण गर्ग

“विश्व शान्ति गणदूत” के मुख्य उद्देश्य

1=>विगत 30 वर्षों से डाॅ•गोपाल चन्द्र मजूमदार के संरक्षण में “विश्व राष्ट्र प्रेम “के झंडे का प्रचार-प्रसार किया जाता रहा है। उसे अब संगठित न्यास विलेख (Trust) के रूप में विश्व के जन-जन को एक झंडे के नीचे लाकर ‘विश्व प्रेम’ से ओतप्रोत करना जिससे विश्व में जन समुदाय सच्चे आनन्द को प्राप्त करने के साथ-साथ किसी भी देश की अखंडता का भय व युद्घ अथवा विश्व युद्ध के भय से हमेशा के लिए छुटकारा पा सके और भविष्य कोई भी तैमूर लन्ग जैसा बनने का सपना तक न देख सके।
“विश्व राष्ट्र प्रेम” का झंडा आसमानी रंग में होगा, जो व्यापकता का सूचक हैं। उस पर तृतीया का चाँद का चिन्ह होगा, जिसको ईस्टर, ईद, अक्षय तृतीया, अकाल एवं प्रेम का मनोवैज्ञानिक चिन्ह बताया गया है। विश्व में प्रचलित सभी धर्म को उनके ही धर्म पुस्तक के अनुसार मनोवैज्ञानिक,वैज्ञानिक व सामाजिक ज्ञान से उजागर करते हुए मानव समाज को सांप्रदायिकता से मुक्त करना व उनके धर्म से वास्तविकता को उजागर करते हुये विश्व में प्रचलित मतभेदों को पूर्णतः समाप्त करना।

2=>डाॅ•गोपाल चन्द्र मजूमदार के कल्पना व विचारानुसार सत्यता को उजागर करने के लिए तथा साम्प्रदायिक मतभेदो को समाप्त करते हुये राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय एकीकरण के लिए सम्पूर्ण भारत वर्ष व सम्पूर्ण विश्व में जगह-जगह “ईआलय” (परिपूर्ण विश्व प्रेम का घर) का निर्माण कराना और उसका रख रखाव तथा संचालन करना।
“ईआलय” में ईश्वर की दोनों शक्तियों निराकार व साकार को ज्योति के रूप में दर्शाते हुए पूजा-अर्चना की व्यवस्था रखी जायेगी ।
दोनों शक्तियां तृतीया के चाँद के आकारनुमा घर के अन्दर व बाहर भी स्थापित किया जायेगा ।
“ईआलय” में प्रथम पूजा “विश्व राष्ट्र प्रेम” के झंडे का होगा। जो “ईआलय” के पास ही स्थापित किया जायेगा। सभी धर्म,जातियों के कल्याण हेतु यह एक रचनात्मक कार्य होगा। “ईआलय” के मुख्य द्वार के बाहर एवं पास में ही सर्प की मूर्ति एवं बच्चा को गोद में लिए हुयें माँ की मूर्ति को स्थापित किया जायेगा ।यह मूर्ति क्रमशः ख़ुद का बोध (अहंभाव का बोध ) एव॔ ममता का बोध का प्रतीक माना जायेगा।
डाॅ• मजूमदार के बनायें गये “ईआलय” के माॅडल के अनुरूप ही “ईआलय”का निर्माण कराया जायेगा ।

3=>आज मानव समाज प्रत्येक क्षेत्र में विकास तो कर रहा है,किन्तु मानवीय भावनाएँ जैसे ममता,करूणा,नम्रता,कोमलता,सेवा भावना,परोपकार भावना,वैराग्य भावना,प्रेम व विश्व प्रेम की भावना,इस तरह के सभी जन कल्याण वाली भावनाएँ सिर्फ पुस्तकों में ही कैद होकर रह गयी हैं। इसलिए डाॅ•गोपाल चन्द्र मजूमदार ने अपनी लेखनी के माध्यम से कहा है कि सच्चा लोकतन्त्र मानव समाज का फैसला होगा। जिसे केवल राजनैतिक आधार से ही पृथ्वी पर उतारा जा सकता है। मानव समाज में मानवीय भावनाओं का न कोई मूल्यांकन है,न ही इन भावनाओं का राजनिति में कोई स्थान है। “विश्व शान्ति गणदूत” ऐसी सभी मानवीय भावनाओं का आदर एव॔ सम्मान करती है एवं सदैव इन भावनाओं को मानव समाज में स्थापित करने का प्रयास भी करती रहेंगी।यह न्यास विलेख एक गैरराजनैतिक संस्था हैं, अतःयह सिर्फ ऐसी राजनिति को प्रोत्साहित करेगी,जो उनके इस तरह के उददेश्य को पूरी करती है।

4=>डाॅ•गोपाल चन्द्र मजूमदार के सभी विचारों का विश्वस्तरीय प्रचार-प्रसार करना। उनके द्वारा लिखी तीनो पुस्तकों ( 1-मानव समाज का फैसला, 2-.परिपूर्ण शाश्वत प्रेम दर्शन, 3-सम्पूर्ण विश्व में केवल चार दर्शन है ) का प्रचार-प्रसार करना।

5=>अनाथालयों का संचालन करना। उनके उत्थान के लिए निःशुल्क शिक्षा एव॔ चिकित्सा की व्यवस्था कराना और प्रतिमा को निखारना।

6=>वृद्धा आश्रमों व अविकसित/विकलांगों के उत्थान के लिए आश्रम,विद्यालय,तकनीक विद्यालयों व कृतिम अन्ग निर्माण इकाइयों का स्थापना कराना एवं आत्म निर्भरता को प्रोत्साहित करना।

7=>पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण
8=>सभी धर्मो के लिए धर्मशाला का निर्माण कराना 9…..
निशुल्क अस्पताल का निर्माण कराना ।
9=>मानव समाज के उत्थान के लिए विद्यालय खोलना,चलाना और अगर हो सके तो उक्त उददेश्य के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना करना।